बातें न कर
पर सुनहरे , पर रुपहले , तितलियों के नोंच कर
और जो कर तू काम स काम प्यार को बातें न कर
छुरी, चाकू, बम पहन कर घूमते जब लोग हों
जीभ को खामोश रख त्यौहार की बातें न कर
स्नेह की बरसात में जब गिर गयी अच्छा हुआ
अब खुदा के वास्ते दीवार की बातें न कर
बाजुओं पर कर भरोसा पार तब हो पाएगा
भवर में जब फंस चूका , पतवार को बातें न कर
चापलूसों ने कहा सुन कर कथा नाराज हो
चल निकल ले या यहां खुद्दार की बातें न कर
पर सुनहरे , पर रुपहले , तितलियों के नोंच कर
और जो कर तू काम स काम प्यार को बातें न कर
छुरी, चाकू, बम पहन कर घूमते जब लोग हों
जीभ को खामोश रख त्यौहार की बातें न कर
स्नेह की बरसात में जब गिर गयी अच्छा हुआ
अब खुदा के वास्ते दीवार की बातें न कर
बाजुओं पर कर भरोसा पार तब हो पाएगा
भवर में जब फंस चूका , पतवार को बातें न कर
चापलूसों ने कहा सुन कर कथा नाराज हो
चल निकल ले या यहां खुद्दार की बातें न कर